पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का शुभारंभ शुक्रवार शाम 4 बजे हुआ। 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। जानिए रथ यात्रा की पूरी जानकारी और खास बातें।
पुरी में रथ यात्रा का शुभारंभ: भगवान विराजे अपने रथों पर
पुरी में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा शुक्रवार को पारंपरिक रथों पर विराजित हुए।
सुबह मंगल आरती और विशेष पूजन विधियों के बाद तीनों विग्रहों को रथों पर स्थापित किया गया।
- भगवान जगन्नाथ: नंदी घोष रथ
- देवी सुभद्रा: दर्पदलन रथ
- बलभद्र जी: तालध्वज रथ
शाम 4 बजे शुरू हुई रथ यात्रा, गजपति महाराज ने की पारंपरिक 'पाहिंद विधि'
दोपहर 3 बजे, पुरी के राजपरिवार के गजपति दिव्य सिंह देव ने सोने की झाड़ू से रथ मार्ग को बुहारा लगाकर ‘पाहिंद विधि’ निभाई, जिससे रथ यात्रा का आधिकारिक शुभारंभ हुआ।

इसके बाद भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं, जो लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर भगवान की मौसी का घर माना जाता है।
देशभर में श्रद्धा की लहर – अहमदाबाद में भी भव्य आयोजन
पुरी के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में भी रथ यात्राओं का आयोजन हुआ।
अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा विशेष रूप से भव्य रही:
- गृह मंत्री अमित शाह ने सुबह 4 बजे मंगल आरती की।
- मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पारंपरिक पाहिंद विधि के साथ रथ यात्रा की शुरुआत करवाई।
- रात्रि 8:30 बजे तक भगवान का मंदिर में पुनः आगमन हुआ।
रथ यात्रा 2025 की Highlights:
🔸 10 लाख से अधिक श्रद्धालु पुरी में उपस्थित
🔸 परंपरागत रथों पर भगवान की स्थापना
🔸 गजपति महाराज की अगुवाई में विधिवत यात्रा शुरू
🔸 देशभर में भक्तिमय माहौल

